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देश की अग्रणी साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था संपर्क क्रांति परिवार द्वारा आज इन्फो पार्क ग्रेटर नोएडा में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में संस्था द्वारा कला, साहित्य,संस्कृति, सिनेमा,मीडिया, खेल आदि के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण योगदान देने वाली नारी शक्ति, जिन्होंने संघर्ष के कठिन राह पर चलकर अपने जीवन की सशक्त कहानी स्वंय अपने हाथों लिखी को सम्मानित किया गया।

श्रीमती स्वर्णलता को सम्मानित करते हुए
श्रीमती स्वर्णलता को सम्मानित करते हुए

संपर्क क्रांति परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिंदी साहित्य में विशेष रुचि रखने वाली श्रीमती स्वर्णलता टंडन जो अपनी रचनाओं को स्वर्णलता ’सोन’ के नाम से उकेरती हैं, को आज राष्ट्र शक्ति शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किया गया। इस मौके पर इस भव्य कार्यक्रम में शहर की गणमान्य हस्तियां मौजूद रही। आपको बता दें कि श्रीमती स्वर्णलता टंडन का जन्म 6 अक्टूबर 1949 में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा स्नातकोत्तर अंग्रेजी साहित्य में पूरी की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद श्रीमती स्वर्ण लता टंडन ने बैंक में एक अधिकारी के रूप में कार्य किया। उनकी शादी दिल्ली के रहनेवाले और समाज की जानी-मानी शख्सियत श्री जगमोहन टंडन से संपन्न हुआ। विवाह के बाद अपने पारिवारिक दायित्व को निभाते हुए स्वर्गीय श्री अमर चंद्र जी की सुपुत्री स्वर्ण लता सोंन ने अपने बचपन की साहित्यिक रुचि को नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने साहित्य से लगाव को बरकरार रखते हुए बचपन से ही अनेक रचनाओं को बेहतरीन तरीके से उकेरा। उन्होने बचपन में लिखने के शौक के साथ साथ स्कूलों में गायन प्रतियोगिताओं में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व किया। स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने बचपन में कई इनाम भी जीते। अपने कॉलेज के दिनों में उन्होंने कई पत्रिकाओं का संपादन किया। उन्होंने अपने कॉलेज में ऑल राउंडर सर्वोत्तम छात्रा की शील्ड प्राप्त की। कॉलेज में अपने अच्छे कर्तव्य के लिए सर्वोत्तम छात्रा भी चुनी गई। इंटर की परीक्षा में संगीत गायन में विशेष योग्यता प्राप्त कर उन्होंने कॉलेज में लगभग 30 कविताएं लिखी। 150 से ज्यादा भजन व 1200 से ज्यादा गीत ग़ज़ल भी लिखे। एक साझा संकलन मे उनकी ’उम्मीदों के परिंदे’ व कुछ अन्य कविताएं भी प्रकाशित हुई है। ’सफर की यादों” में एक लेख प्रकाशित होने के बाद ’मां का आंचल’ नमक प्रथम भजनों की पुस्तक भी प्रकाशित हुई। साहित्य संगम संस्थान द्वारा उनकी पुस्तक ’आहुति’ को प्रकाशित किया गया। काव्यांचल नाम की दूसरी पुस्तक में भी उनका एक लेख प्रकाशित हुआ। स्वतंत्र लेखन मंच द्वारा उनके जन्मदिन पर पुस्तक ’अवंतिका’ को भेंट कर उन्हें सम्मानित भी किया गया। उनकी रचनाएं अनेक ई पुस्तकों में भी छपती रहती हैं। अनेक सांझा संकलनओं में उनकी कविताएं प्रकाशित होती रहती है। कई प्रमुख समाचार पत्रों में भी उनकी कविताएं प्रकाशित हुई है। साहित्य जगत में अपने लेखों के द्वारा उनको 1100 से ज्यादा सम्मान पत्र प्राप्त हो चुके हैं। वह साहित्य संगम संस्थान दिल्ली इकाई की परामर्शदात्री भी नियुक्त हो चुकी है।l स्वतंत्र लेखन मंच की अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने अनेक रचनाओं का लेखन किया।