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  • मेरठ विकास प्राधिकरण का जॉन डी बना अवैध निर्माण और कच्ची कॉलोनियों का अड्डा

मेरठ में मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा एक माह से भी ज्यादा समय से अवैध निर्माण पर कार्यवाही की जा रही है। एक के बाद एक प्राधिकरण की टीमें अभियान चलाकर एक दर्जन से भी ज्यादा बुलडोजरो की मदद से पूरे मेरठ में अवैध निर्माणों पर कार्यवाही करते हुए दिखाई दे रही हैं, और इस ध्वस्तीकरण अभियान की मीडिया में भी एक के बाद एक खबरें प्रकाशित और प्रसारित होते भी दिखाई दे रही हैं। लेकिन अगर धरातल पर इस ध्वस्तीकरण अभियान को जांचा जाए तो दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि अवैध निर्माण को बख्शा ना जाए और गरीबों को छेड़ा ना जाए। लेकिन इसके बावजूद भी मेरठ में मेरठ विकास प्राधिकरण से जुड़े अधिकारी अवैध निर्माणों को लेकर किस तरीके से खेल करते हैं इसकी बानगी देखने को मिलेगी

मेरठ विकास प्राधिकरण के जोन डी में कहने को तो यहां हर अभियान में कार्रवाई होती हुई दिखाई जाती है और नाम को बुलडोजर भी चलते हैं लेकिन धरातल पर देखा जाए तो पिक्चर बिल्कुल उलट है। गरीब मजलूमो के निर्माणों पर जरूर बुलडोजर चला दिया जाता है। लेकिन रसूखदारो की कच्ची कॉलोनी और अवैध निर्माणों को लेकर जोनल और अवर अभियंता किस तरीके से खेल करते है यह देखना हो तो मेरठ विकास प्राधिकरण के जोन डी के चारों सेक्टरों में जाकर कहीं भी देखा जा सकता है। क्योंकि सभी सेक्टर कच्ची कॉलोनी और अवैध निर्माणों से पटे पड़े है। क्योंकि इन पर प्राधिकरण में तैनात जोनल और अवर अभियंताओं की साफ तौर पर मेहरबानी होती दिखाई दे रही है। क्योंकि अभी भी इन पर ना तो कोई असरदार कार्यवाही ही की जा रही है और ना ही इन पर कोई कानून का चाबुक चल रहा है।

मेरठ विकास प्राधिकरण के केवल जॉन डी क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माणों पर ही यदि मेरठ के सख्त कमिश्नर सुरेंद्र कुमार और मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी स्वयं संज्ञान ले तो मेरठ विकास प्राधिकरण के खजाने में करोड़ों के राजस्व का इजाफा हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार जोन डी 2 के गढ़ रोड पर दतावली गांव में इस समय भी कच्ची कॉलोनियों की बाढ़ सी आई हुई है। काली नदी का पुल पार करते ही दतावली के मुख्य फाटक से गांव में घुसते ही अवैध कच्ची कॉलोनी में सैकड़ों से भी ज्यादा प्लॉट काटकर पक्के निर्माण कर दिए गए हैं। क्या प्राधिकरण की टीम इन पक्के निर्माणों पर बुलडोजर से धवस्तीकरण की कार्रवाई कर पाएगी ? जबकि दतावली के इस अवैध कॉलोनी के पीछे अब एक कच्ची कॉलोनी की एक्सटेंशन कॉलोनी भी कटनी शुरू हो चुकी है। जिस में भी लगातार पक्के निर्माण आज भी जारी है। आखिर इस तरीके के अवैध निर्माणों और कच्ची कोलोनियो को क्यों छोड़ा जा रहा है और क्यों इन पर बुलडोजरो से कार्रवाई नहीं की जा रही है यह अपने आप में प्राधिकरण के जोनल अधिकारी और अवर अभियंताओ पर सवाल खड़ा कर रहा है। यदि प्राधिकरण के अधिकारी इस अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करें तो शायद मेरठ विकास प्राधिकरण के खजाने में करोड़ों रुपए का राजस्व पहुंच जाएंगा। लेकिन चर्चाओं पर गौर करे तो अपनी जेब गर्म करने के लिए प्राधिकरण के चंद अधिकारी और कर्मचारी प्राधिकरण के करोड़ों का राजस्व का नुकसान करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।