प्रचार में लगे कांग्रेस के नेता

हिमाचल में कांग्रेस पार्टी आपसी एकता का ढोल पीट रही है, तो दूसरी ओर पार्टी के महत्वाकांक्षी नेता हैं कि एक दूसरे को नीचा दिखाने में कोई मौका चूकना नहीं चाहते। जिससे चुनावी साल में हिमाचल कांग्रेस संगठन में किये गये बदलाव के बावजूद पार्टी की एकता के दावे धराशायी होते नजर आ रहे हैं। नेताओं में आपसी वर्चस्व की जंग में पार्टी में गुटबाजी हावी होने लगी है। हालांकि कुछ माह पहले इसी गुटबाजी को खत्म करने के लिये ही पार्टी अध्यक्ष कुलदीप राठौर को हटाकर सांसद प्रतिभा सिंह को अध्यक्ष बनाया गया था। व उनके साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाये गये। ताकि गुटबाजी पर अंकुश लग सके। लेकिन लगता है कि कांग्रेस आलाकमान का एकता का फार्मूला हिमाचल कांग्रेस में कामयाब होता दिखाई नहीं दे रहा ।

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दरअसल, प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने धर्मशाला में सरकार के खिलाफ रोड शो के बहाने अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर खुद को कांग्रेस का प्रभावशाली नेता बताने का प्रयास किया , तो दूसरी ओर पालमपुर में कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने इंटक की रैली में अपने समर्थकों को जुटाकर ऐलान कर दिया कि पार्टी चुनावों में सर्वे के आधार पर ही टिकट देगी। और इसके लिये सर्वे कराया जा रहा है। मामला यहां ही नहीं रूका , उसी दिन चुनाव प्रचार समिति एवं टिकट वितरण कमेटी के अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने पत्रकार सम्मेलन में प्रतिभा सिंह के दावों पर पानी फेरते हुये कहा कि पार्टी नये चेहरों को मैदान में उतारेगी। और कुछ लोगों के टिकट भी कट सकते हैं। उन्होंने इस माह के अंत तक करीब तीस टिकट फाइनल कर देने का दावा कर टिकट के कई दावेदारों में पशोपेश में डाल दिया हैं।

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राजनीतिक जानकार रविन्द्र सूद मानते हैं कि कांग्रेस अपनी गुटबाजी खत्म नहीं कर पा रही है। जिससे चुनावों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। वह मानते हैं कि जब तक तीनों नेताओं को एक मंच पर नहीं लाया जायेगा, तब तक पार्टी को नुकसान ही होगा। लिहाजा कांग्रेस पार्टी को ऐसे कार्यक्रम बनाने होंगे। जिसमें सभी नेता एक साथ मंच पर हों। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अभी भी नेतृत्व को लेकर दुविधा में हैं। सत्ता में आने के लिए यह दुविधा खत्म होनी चाहिये।

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता बृज मोहन सोनी मानते हैं कि पार्टी इन दिनों संकट के दौर से गुजर रही है। आज पार्टी को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जैसे कद्दावर नेता की जरूरत है। जो सबको साथ लेकर चल सके और चुनावों में जीत दिला सके। सोनी बताते हैं कि वीरभद्र सिंह हमेशा ही पार्टी के लिये संकटमोचक साबित हुये। उन्होंने कई चुनाव अकेले ही जितवा दिये। लेकिन आज हालात अलग हैं।

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चुनावी साल में हिमाचल कांग्रेस में नेताओं में आपसी वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। हालांकि पिछले दिनों कांग्रेस आलाकमान ने गुटबाजी को खत्म करने के मकसद से प्रदेश कांग्रेस की कमान सांसद प्रतिभा सिंह को सौंप कर सुखविंदर सिंह सुक्खू को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया था। लेकिन इसके बावजूद पार्टी की गुटबाजी खत्म नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री , कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू के अपने अपने दौरे हो रहे है। इसी के चलते धर्मशाला में प्रतिभा सिंह के दौरे के कुछ दिन बाद सुखविंदर सिंह सुक्खू का रोड शो हुआ तो उसमें अच्छी खासी भीड जुटाकर सुक्खू ने अपनी ताकत का एहसास अपने विरोधियों को कराया।

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धर्मशाला में कांग्रेस पार्टी की ओर से बढती मंहगाई , पुलिस भर्ती पेपर लीक व अगिनवीर योजना के विरोध में प्रोटेस्ट मार्च आयोजित किया गया था। लेकिन इसमें न तो कांग्रेस अध्यक्षा प्रतिभा सिंह और न ही नेता प्रतिपक्ष मुकेश अगिनहोत्री पहुंच पाये। जिससे कांग्रेसी एकता के दावे धराशायी होते नजर आये। कांग्रेसी एकता के दावों के बावजूद कांग्रेस नेताओं के अपने अपने कार्यक्रम इन दिनों होने लगे हैं। जिससे एक बार फिर कांग्रेस गुटबाजी को हवा मिलनी लगी है। धर्मशाला के कोतवाली बाजार से होकर कचहरी अड्डा तक सुक्खू के नेतृत्व में निकले विरोध मार्च में शुरू में सुक्खू समर्थक ही जुटे, लेकिन वीरभद्र गुट के कई नेता जो सुधीर शर्मा के दफ्तर में माहौल पर नजर रखे थे, भीड़ बढ़ती देख मार्च में शामिल होने को मजबूर हुये। बताया जा रहा है कि कांगड़ा के कई पूर्व विधायक शुरू से ही सुक्खू विरोधी रहे हैं। उन्हें अब लग रहा है कि सुक्खू इस बार उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। यही वजह रही कि सुक्खू ने यहां विप्लव ठाकुर को जहां सम्मानित किया, तो दूसरे नेताओं को नजरअंदाज किया। एक तरह से सारा महौल सुक्खू के शक्ति प्रदर्शन में तबदील हो गया। और सुक्खू समर्थको ने अपने नेता के पक्ष में खूब नारेबाजी की। एक तरह से प्रतिभा सिंह की रैली के मुकाबले सुक्खू के शो में अधिक भीड़ थी। लिहाजा अब तय है कि प्रदेश के सबसे बडे जिला कांगड़ा जिसमें 15 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, में आने वाले दिनों कांग्रेस नेताओं में और अधिक कशमकश देखने को मिलेगी। चूंकि टिकट को लेकर इन दिनों नेताओं में अच्छी खासी होड मची है। खुद सुक्खू ने टिकट आंबटन का मापदंड तय करते हुये स्पष्ट किया है कि इस बार साफ छवि के नेताओं को टिकट मिलेगी। पार्टी हाईकमान से भी इसको लेकर चर्चा हुई है। आम परिवार के युवा राजनीति में आगे आएं। राजनीति में वे लोग आगे आएं जिनके मन में सेवा भाव हो। टिकट केवल ईमानदार व्यक्तित्व के व्यक्ति को ही मिलेगा। हिमाचल की जनता जानती है कि कौन से चेहरे को वोट डालना है। सब जानते हैं कि किस चेहरे के आधार पर वोट डलेगा। उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री के चेहरे की बात को टालते हुए कहा कि कांग्रेस में कोई भी मुख्यमंत्री का चेहरा हो सकता है। इसके लिए पहले विधायक बनना जरूरी है। सुक्खविन्दर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आने वाले चुनावों में कांग्रेस पार्टी ही अपनी सरकार बनायेगी। यहां तीसरे दल का कोई अस्तित्व नहीं है। चुनावों में भाजपा के साथ कांग्रेस का ही मुकाबला होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह एकजुट है। और एकजुटता के साथ ही चुनावों में जीत हासिल करेगी।
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सुक्खू ने गुटबाजी को भी सिरे से खारिज करते हुये कहा कि जो लोग ऐसी बातें कर रहे हैं, वह कांग्रेस कल्चर से वाकिफ ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अगिनहोत्री और खुद मैं , भले ही अलग अलग दौरे प्रदेश में कर रहे हों, लेकिन हमारा मकसद भाजपा को सत्ता से बाहर कर कांग्रेस पार्टी की सरकार बनाना हैं। लेकिन हम लोग कई मौकों पर एक मंच पर भी इकठ्ठा हुये हैं। गुटबाजी की बात भाजपा अपनी सोची समझी रणनिती के तहत उठा रही है। कांग्रेस एकजुट है। हाथ के निशान के नीचे सब एकजुट है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल का मतदाता वर्तमान सरकार से छुटकारा पाना चाहता है। उनके सामने कांग्रेस एक बेहतर विकल्प है। आज प्रदेश में बेरोजगारी विकराल रूप ले चुकी है। नौकरियों के रास्ते बंद हो चुके है। जिससे युवा निराश है। सबसे ज्यादा निराशा तो युवाओं को अगिनपथ योजना से मिली है। और प्रदेश में पिछले दिनों पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले से युवाओं को निराशा हाथ लगी हैं। यहा पुलिस भर्ती का पेपर सरकारी सरपरस्ती में नीलाम किया गया।

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उन्होंने कहा कि अब इस बार मुझे कांग्रेस आलाकमान ने चुनाव प्रबंधन और प्रचार समिति की कमान सौंपी है। हमारे लिये सत्ता पाना ही प्रमुख मकसद नहीं है। हम प्रदेश में ऐसी सरकार लाने के लिये प्रयासरत हैं, जो न केवल लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरे बल्कि शासन व्यवस्था में भी बदलाव ला सके। चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के नाते मैं अपनी जिम्मेवारी बखूबी निभाउंगा, हमारा एक मात्र मकसद कांग्रेस को वापिस सत्ता में लाना है। कांग्रेस पार्टी भाजपा की जय राम सरकार को सत्ता से इस बार बाहर करेगी।
लेकिन, अब सुक्खू के दौरों को लेकर उनके विरोधी सवाल उठाने लगे हैं। उनका आरोप है कि सुक्खू स्थापित नेताओं को कमजोर कर अपने समर्थक नेताओं को बेवजह बढ़ावा दे रहे हैं। जिससे पार्टी को नुकसान होगा। लेकिन हम लोग कई मौकों पर एक मंच पर भी इकठ्ठा हुये हैं। गुटबाजी की बात भाजपा अपनी सोची समझी रणनिती के तहत उठा रही है। कांग्रेस एकजुट है। हाथ के निशान के नीचे सब एकजुट है।

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उन्होंने कहा कि हिमाचल का मतदाता वर्तमान सरकार से छुटकारा पाना चाहता है। उनके सामने कांग्रेस एक बेहतर विकल्प है। आज प्रदेश में बेरोजगारी विकराल रूप ले चुकी है। नौकरियों के रास्ते बंद हो चुके है। जिससे युवा निराश है। सबसे ज्यादा निराशा तो युवाओं को अगिनपथ योजना से मिली है। और प्रदेश में पिछले दिनों पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले से युवाओं को निराशा हाथ लगी हैं। यहा पुलिस भर्ती का पेपर सरकारी सरपरस्ती में नीलाम किया गया।

उन्होंने कहा कि अब इस बार मुझे कांग्रेस आलाकमान ने चुनाव प्रबंधन और प्रचार समिति की कमान सौंपी है। हमारे लिये सत्ता पाना ही प्रमुख मकसद नहीं है। हम प्रदेश में ऐसी सरकार लाने के लिये प्रयासरत हैं, जो न केवल लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरे बल्कि शासन व्यवस्था में भी बदलाव ला सके। चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के नाते मैं अपनी जिम्मेवारी बखूबी निभाउंगा, हमारा एक मात्र मकसद कांग्रेस को वापिस सत्ता में लाना है। कांग्रेस पार्टी भाजपा की जय राम सरकार को सत्ता से इस बार बाहर करेगी। लेकिन, अब सुक्खू के दौरों को लेकर उनके विरोधी सवाल उठाने लगे हैं। उनका आरोप है कि सुक्खू स्थापित नेताओं को कमजोर कर अपने समर्थक नेताओं को बेवजह बढ़ावा दे रहे हैं। जिससे पार्टी को नुकसान होगा।