df521fc9 8f7c 4bae 98be 1ad5f121b5ee

Meerut: मां बगलामुखी एवम शंकर भगवान को 1008 कमल पुष्प का श्रृंगार वैशाख मास की चतुर्थी तिथि 24/04/2023 सोमवार को सम्पन्न होगा। आचार्य प्रदीप गोस्वामी के अनुस्रार भगवान भोलेनाथ को कमल पुष्प चढ़ाने का विधान भी है। इस परम पूज्य पुनित कार्य में आप सभी भक्त श्रद्धालु उपासक साधक को स्नेह निमंत्रण दिया गया है।आचार्य प्रदीप गोस्वामी बताते है की कमल पुष्प चढ़ाने का हमारा सत्य संकल्प हरि के द्वार हरिद्वार में मंदिर गौशाला मोक्ष स्थली निर्माण था जो उन्हें बहुत जल्दी पुर्ण करना है। अब आचार्य आदिशक्ति मां बगलामुखी भोलेनाथ को प्रसन्न कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति कर लेना चाहते हैं। अब उन्हें कमल पुष्प चढ़ाने का विधान वर्णन प्राप्त हुआ है।

त्रेतायुग में जब रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था और भगवान श्रीराम वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई कर दिए थे। असुर और वानर सेना में भयंकर युद्ध चल रहा था। तब भगवान श्रीराम और रावण दोनों ने ही अपनी विजय के लिए मां चंडी की पूजा और यज्ञ किया था। लेकिन हनुमान जी ने रावण के उस यज्ञ को पूरा नहीं होने दिया, वहीं भगवान श्रीराम को लंका विजय का आशीष मिला। भगवान श्रीराम मां चंडी को अपना एक नेत्र अर्पित करने के लिए तैयार थे। इसकी पृष्ठभूमि में रावण की माया थी।
लंका युद्ध के समय श्रीराम की चंडी पूजा का वृतांत।

युद्ध के समय ब्रह्मा जी ने रावण वध तथा लंका विजय के लिए श्रीराम को मां चंडी को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ करने का सुझाव दिया। उन्होंने चंडी पूजा के समय 108 नीलकमल मां चंडी को अर्पित करने को कहा था। भगवान श्रीराम ने चंडी पूजा के लिए 108 नीलकमल मंगवा लिए। रावण को जब श्रीराम के चंडी पूजा करने की बात पता चली तो उसने अपनी माया की शक्ति से एक नीलकमल गायब कर दिया।
चंडी पूजा के समय भगवान श्रीराम को पता चला कि एक नीलकमल कम हो गया है। अब श्रीराम को लगा कि वे चंडी पूजा को सफल नहीं कर पाएंगे। नीलकमल का मिलना दुर्लभ था। तब उनको याद आया कि उनके भक्त तो उनको नीलकमल कहते हैं। नीलकमल के नाम से पूजा करते हैं। फिर उन्होंने चंडी पूजा में कम हो रहे एक नीलकमल की जगह अपना नेत्र अर्पित करने का फैसला किया।
चंडी पूजा के समय उन्होंने एक एक करके 107 नीलकमल मां चंडी को अर्पित कर दिया। अब अंत में उन्होंने अपने एक नेत्र को मां चंडी को अर्पित करने का फैसला किया था तो उन्होंने अपने तरकश से तीर निकाला। तीर से वे अपना एक नेत्र निकालने जा रहे थे, तभी आदिशक्ति मां जगदम्बा प्रकट हुईं। उन्होंने भगवान श्रीराम से कहा कि वे उनकी पूजा से प्रसन्न हैं। आपको अपने नेत्र अर्पित करने की आवश्यकता नहीं है। मां जगदम्बा ने श्रीराम को लंका विजय का आशीर्वाद प्रदान किया।
आचार्य प्रदीप गोस्वामी बताते हैं कि 1008 कमल पुष्प अर्पित करने का सौभाग्य बहुत ही मुस्किल से प्राप्त होता है। इस लिए कुछ समय निकाल कर दर्शन करने अवश्य आए।।

विचार:आचार्य प्रदीप गोस्वामी, कमलेश शर्मा, लोकेश दास
मां बगलामुखी धाम यज्ञशाला श्री दक्षिणेश्वरी काली पीठ प्राचीन वन खंडेश्वर महादेव शिव मंदिर कैलाश प्रकाश स्टेडियम चौराहा साकेत मेरठ