WhatsApp Image 2022 06 03 at 4.50.30 PM

मेरठ को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाने में लगातार प्रयासरत रही उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को कुछ सरकारी विभाग की लगातार ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। जिस मेरठ विकास प्राधिकरण पर मेरठ के सुनियोजित विकास का जिम्मा है वही मेरठ विकास प्राधिकरण लगातार अवैध निर्माणों को बढ़ावा देकर स्मार्ट सिटी की राह में रोड़ा बने हुए हैं।

जानकारों द्वारा दी गई खबर को सही माने तो मेरठ विकास प्राधिकरण के कुछ अधिकारी और कर्मचारी ही प्राधिकरण के राजस्व को लगातार चूना लगाने में लगे हुए हैं। क्योंकि जितने भी व्यावसायिक निर्माण के मानचित्र स्वीकृत करके बनाए जा रहे हैं वह मानचित्र के अनुरूप बनते दिखाई नहीं दे रहे हैं। जिससे मेरठ विकास प्राधिकरण को करोड़ों रुपए की राजस्व की हानि लगातार होती चली आ रही है। यही वजह है कि मेरठ विकास प्राधिकरण का राजस्व का ग्राफ लगातार रसातल की तरफ जाता चला जा रहा है। लगातार एक के बाद एक ऐसे निर्माण सामने आ रहे हैं जिनसे प्राधिकरण के खजाने को बड़ी मात्रा में राजस्व मिल सकता था। क्योंकि यदि स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप निर्माण होगा तो राजस्व निर्माणकर्ता से नियम पूर्वक वसूला जाएगा। लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारी अवैध निर्माण कर्ताओं के साथ खेल कर के मानचित्र में घालमेल कर व्यावसायिक निर्माण को अवैध रूप से बनवाने में लगे हुए हैं।

आजकल ऐसा ही एक निर्माण गढ़ रोड पर काफी चर्चाओं में है। जो मेरठ विकास प्राधिकरण के जॉन डी 3 में नक्शे के विपरीत बनने वाले इस व्यवसायिक निर्माण को एक मरहूम प्रतिष्ठित बिल्डर के पुत्र द्वारा विकसित कराया जा रहा हैं। इस व्यवसायिक निर्माण में काफी अनियमितताएं बताई जा रही हैं। सूत्रों की माने तो कहने को तो इस निर्माण का नक्शा पास है लेकिन जिस हिसाब से नक्शा स्वीकृत है उस हिसाब से व्यवसायिक निर्माण बनता दिखाई नहीं दे रहा है। मौके पर लगे कारीगरों ने बताया कि यह व्यवसायिक निर्माण किसी राहुल गुप्ता बिल्डर द्वारा बनवाया जा रहा है और मेरठ विकास प्राधिकरण में अधिकारियों से सेटिंग–गेटिंग करके व्यावसायिक निर्माण को तेजी से बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बेसमेंट में जिस तरीके से काम चल रहा है उससे साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि नक्शे में खेलकर बेसमेंट के साथ-साथ निर्माण को आगे बढ़ाया जा रहा है। लेकिन छन के आने वाली खबरों पर यदि यकीन किया जाय तो प्राधिकरण के कुछ भ्रष्ट अधिकारी लगातार इस तरीके के अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं। जो अपनी जेब गर्म करने के लिए प्राधिकरण के राजस्व को जाया होने से भी नहीं रोक पा रहे हैं।