सिरमौर जिला के गिरिपार इलाके के लोगों

शिमला,विजयेन्दर शर्मा । अगर सबकुछ ठीक रहा तो केन्द्र सरकार हिमाचल प्रदेश के चुनावों से ठीक चार महीने पहले हिमाचल के सिरमौर जिला के गिरिपार इलाके के लोगों को आदिवासी का दर्जा दे देगी। इसके लिए बाकायदा तैयारियां चल रही है। अगर ऐसा होता है तो हिमाचल के इस इलाके के लोगों के वर्षों से चले आ रहे संघर्ष न केवल अपनी मंजिल मिलेगी। बल्कि इस इलाके में राजपूत और ब्राह्मणों का जातिवादी दबदबा भी खत्म हो जायेगा। चुनावों में भाजपा को इसका राजनीतिक लाभ भी मिलेगा।

☛ Subscribe to our Youtube Channel – Crime Sansar News

हालांकि , इससे पहले इस मामले पर राजनीति ही होती आई है। सरकारें आईं व गई,लेकिन लोगों की इस मांग को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। अब केन्द्र सरकार इस मामले पर गंभीर है। बताया जा रहा है कि जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा पेश किए जाने वाले प्रस्ताव पर अंतर मंत्रालयी विचार विमर्श की तैयारी है। पहले जहां हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा देने की मांग थी, वहीं केंद्र अब इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है कि इस पूरे इलाके के लोगों को एसटी का दर्जा दे दिया जाए।

For more update about latest news & entertaining videos… #Crimesansar News

सत्तारूढ दल भाजपा का प्रयास है कि इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना को अमली जामा पहनाया जाये। ताकि सिरमौर जिला की राजनिति को प्रभावित करने वाले इस समुदाय के मतदाताओं को रिझाया जा सके। भाजपा के यह प्रयास अगर सिरे चढते हैं तो इससे सिरमौर के ट्रांस गिरी क्षेत्र की 154 पंचायतों की करीब तीन लाख की आबादी लाभान्वित होगी। हाटी समुदाय प्रदेश के सिरमौर जिला के चार विधानसभा क्षेत्रों में रहता है, जिसमें शिलाई, पांवटा साहिब, रेणुका और पच्छाद शामिल हैं।

☛ Like us: Youtube channel: https://www.youtube.com/channel/UCLynGO6dgXpSnEsD_4DJbAw

सिरमौर जिला की सीमा से सटे उत्तराखंड में इस समुदाय को पहले ही जनजातीय दर्जा प्राप्त है। उत्तराखंड के जौनसार क्षेत्र में 1967 (तब अविभाजित उत्तर प्रदेश का हिस्सा) में भी इसी तरह से पूरे इलाके में रहने वाले लोगों को एसटी का दर्जा दिया गया था। इसके अलावा सिरमौर का ट्रांस-गिरी क्षेत्र का बॉर्डर जौनसार से लगा हुआ है। माना जाता है कि दोनों इलाके भले ही अलग-अलग राज्य में हैं, लेकिन दोनों में काफी सांस्कृतिक समानताएं हैं।

☛ Follow us- Facebook https://facebook.com/crime.sansar

राज्य के किसी क्षेत्र में हाल के दिनों में आदिवासी स्टेटस नहीं मिला है। अब केन्द्र सरकार की योजना को राज्य के चुनावों से पहले एक राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि अगर इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है और इसे लागू किया जाता है, तो इसका मतलब होगा कि कई ओबीसी समुदायों और अनुसूचित जातियों के साथ-साथ ठाकुर और ब्राह्मण भी ’आदिवासी’ बन जाएंगे।

☛ Subscribe to our Youtube Channel – Crime Sansar News

दरअसल, देश में बनी आरक्षण कैटिगरी में एसटी को ओबीसी और एससी की तुलना में अधिक लाभ मिलते हैं। इस तरह का कोई भी फैसला क्षेत्र के मतदाताओं, विशेष रूप से राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हट्टी समुदाय को लुभाने की बड़ी कोशिश हो सकती है और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। इसके साथ ही इस फैसले से लाभान्वित होने वाली उच्च जातियां और ओबीसी समुदाय भी भाजपा के समर्थन में आ सकता है। 2022 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश में जुटी है। जबकि राज्य का इतिहास रहा है कि कांग्रेस और भाजपा बारी-बारी से सरकार बनाते हैं। राज्य में इस बार सत्ता विरोधी लहर तब सामने आई थी जब कांग्रेस ने नवंबर 2021 में मंडी लोकसभा क्षेत्र और तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव जीते थे।