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उत्तराखंड से उत्तरकाशी में बीती रात भूकंप के तीन झटके महसूस किए गए। तीन झटकों से लोगों में डर का माहौल हो गया है।

देहरादून। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में शनिवार देर रात एक के बाद एक तीन बार भूकंप के झटके आने से लोग दहशत में आ गए हैं। देर रात आए इन भूकंप के झटकों से लोग घबरा कर घरों से बाहर निकल आए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.5 थी। भूकंप के झटकों से किसी भी तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। इसका केंद्र तहसील भटवाड़ी के सिरोह के जंगल में बताया जा रहा है। भूकंप की तीव्रता हल्की होने के कारण जान माल का नुकसान नहीं हो पाया है। हालांकि इन झटकों के बाद इस इलाके के लोग सहम जरूर गए थे।

उत्तरकाशी में देर रात 12:40 बजे पर अचानक से बर्तनों के हिलने, खिड़कियों के कांच की झनझनाहट की आवाज सुनाई दी। इसके बाद थोड़ी ही देर में 12:45 बजे भूकंप का दूसरा झटका महसूस हुआ, जिससे लोग सहम गए। वहीं, कुछ देर बाद तीसरा झटका 1:01 बजे पर आया, जिससे लोग डर कर अपने घरों से बाहर निकल आए। इस तरह बार-बार भूकंप के झटकों ने लोगों के मन में डर बैठा दिया कि कहीं यह किसी बड़ी अनहोनी का संकेत तो नहीं।

देर रात महसूस के किए गए इन भूकंप झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.5 आंकी गई और इसका केंद्र सिरोर के जंगल में बताया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार भूकंप के झटकों से किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। उधर, एक ही रात में लगातार तीन झटकों से लोगों को चिंता में डाल दिया।

रात के घर के बाहर ही बिताई। उत्तरकाशी में हाल ही में 13 जनवरी को भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उत्तरकाशी में देर रात आए भूकंप की तीव्रता 2.9 मापी गई थी, जिसका केंद्र जमीन के अंदर 10 किमी गहराई में था।

भूकंप के लिहाज से उत्तराखंड राज्य काफी संवेदनशील है। उत्तराखंड जोन पांच में आता है। गढ़वाल का उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग जिला और कुमाऊं का कपकोट, धारचूला, मुनस्यारी क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील है। इन क्षेत्रों में भी उत्‍तरकाशी सबसे ज्‍यादा संवेदनशील क्षेत्र है।

उत्तरकाशी में शनिवार देर रात आए भूकंप के झटकों ने वर्ष 1991 के विनाशकारी भूकंप की यादें ताजा कर दी है। 20 अक्तूबर 1991 को आए 6.6 रिक्टर स्केल के भूंकप ने भारी कहर बरपाया था। त्रासदी में करीब 768 लोगों की मौत हुई थी। जबकि 5 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

वहीं करीब 20 हजार से ज्यादा आवासीय भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। यहां भूकंप के झटकों के बाद लोगों के जेहन में वर्ष 1991 के विनाशकारी भूकंप की यादें ताजा हो गई। उस समय भी लोग सोए हुए थे कि रात करीब 2ः53 बजे अचानक धरती डोली और जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक सैकड़ों लोग काल के गाल में समा गए थे।

उस भूकंप के बाद से जब भी यहां भूकंप का हल्का झटका महसूस होता है तो लोग सिहर उठते हैं। यहां 1991 के बाद से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। जिसके चलते लोगों में चर्चा है कि यदि बड़ा भूकंप आया तो अब पिछली बार से भी ज्यादा नुकसान हो सकता है।

उत्तरकाशी जनपद भूकंप के दृष्टि से बेहद ही संवेदनशील जिला है, जो भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन-4 औ 5 में आता है।