मेरठ की रोहटा रोड स्थित बिना नक्शा और मानचित्र पास कराए निर्मित हुआ अवैध शॉपिंग कंपलेक्स
  • वटवृक्ष बन चुके इन अवैध निर्माणों को क्या प्राधिकरण का ड्रोन कभी देख पाएगा?

  • एक के बाद हो रहे अवैध निर्माणों के खुलासों के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्यशैली पर लगा प्रश्न चिन्ह

  • रोहटा रोड पर चंद्रा स्टेट नाम के अवैध कॉन्प्लेक्स का निर्माण कर प्राधिकरण की राजस्व की करोड़ों की हानि करते हुए बिल्डर ने भेजी करोड़ों की अवैध दुकानें

  • अवैध निर्माण पर नजर रखने वाले ड्रोन, और बाबा का बुलडोजर कब इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करेंगे यह देखना होगा

मेरठ ( विशेष संवाददाता ),अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने शहर में ड्रोन सर्वे की शुरुआत कर दी है। पहला ड्रोन भी उड़ाया जा चुका है। पूरे शहर में तेजी से अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियां पनपती जा रही हैं। खासतौर पर रोहटा रोड, पल्लवपुरम किला रोड गढ़ रोड पर इनकी संख्या सबसे अधिक है। विशेष तौर पर रोहटा रोड पर अवैध निर्माणों की बाढ़ आई हुई है।

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मेरठ विकास प्राधिकरण के जॉन बी के खंड 4 में स्थित चंद्रा स्टेट नामक अवैध कांपलेक्स इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। आरटीआई में मांगी गई सूचना के आधार पर ज्ञात हुआ कि यह कांपलेक्स पूर्ण रूप से अवैध रूप से निर्मित किया गया है।

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सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार इस अवैध कॉन्प्लेक्स का कोई नक्शा प्राधिकरण से पास नहीं है। भवन स्वामी ने बिना लेआउट के बिना मानचित्र स्वीकृति के इस अवैध कांपलेक्स को तैयार कर व्यवसायिक दुकानो को करोड़ों रुपए में बेच डाला। इसको लेकर अब मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराते हुए जल्द से जल्द इस अवैध कॉन्प्लेक्स पर कार्रवाई करने की मांग भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई है।

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RTI के द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर प्राधिकरण द्वारा अवैध कार्य किए जाने पर वाद संख्या 431/20,432 /20, 433 /20 वाद योजित कर,दिनांक 12 अगस्त 2020 को सीलिंग की कार्रवाई अमल में लाई गई थी। इसके पश्चात दबंग निर्माणकर्ता द्वारा सील तोड़ कर अवैध कांप्लेक्स को पूर्ण कर लिया गया। जिसके बाद 24–11–2020 में मेरठ प्राधिकरण के द्वारा मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा थाना कंकरखेड़ा में एक सील तोड़ने और अवैध निर्माण जारी रखने को लेकर f.i.r. करने के लिए पत्र प्रेषित जरूर किया गया। लेकिन कमाल देखिए कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इस बात का खुलासा भी आरटीआई द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर ही हुआ है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि, अवैध निर्माण करता पर किसी तरीके का कोई वाद पुलिस थाने में दर्ज नहीं किया गया।

आरटीआई से मिली जानकारी के बाद एक के बाद एक हुए खुलासे से यह स्पष्ट हो गया है कि प्राधिकरण के अधिकारियों और अवैध निर्माण कर्ताओं की मिलीभगत से किस तरीके से सरकार के खजाने को करोड़ों का राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। किस तरीके से धड़ल्ले से अवैध निर्माण एक के बाद एक गगनचुंबी होते चले जा रहे हैं। इसका खुलासा चंद्र स्टेट जैसे अवैध कॉन्प्लेक्स पूरी तरीके से बयां कर रहे हैं। अब देखना यह है जब ड्रोन से एक बार फिर सर्वे अवैध निर्माण को लेकर चालू हो चुके हैं क्या इस तरीके के अवैध निर्माणों पर कोई बड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी और नवागंतुक कमिश्नर व जिला अधिकारी/ उपाध्यक्ष इस तरीके के अवैध निर्माण पर कोई सख्त कार्रवाई करेंगे यह भी अपने आप में एक प्रश्न बन गया है।

क्योंकि बड़े अवैध निर्माणों की रिर्पोट प्राधिकरण द्वारा 15 दिनों में निर्माणों कमिश्नर के पटल पर रखनी है जिसके बाद अवैध निर्माण को लेकर नवागंतुक कमिश्नर समीक्षा बैठक करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करेंगी।