abdullah azam

रामपुर से सपा सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान शनिवार की शाम सीतापुर जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर उनके समर्थकों की भीड़ लगी थी, रात करीब 9 बजे वे बाहर आए। भीड़ में कुछ देर रुककर उन्होंने मीडिया से बात की। उन्होंने सरकार पर हमला बोला। कहा कि एक बीमार इंसान को फर्जी मुकदमे लगाकर जेल में 2 साल से बंद रखा हुआ है। उनकी जमानत में आज भी कोई साजिश या रुकावट ऐसी नहीं है, जो डाली नहीं जा रही हो।

न्यायालय से उम्मीद है। आज तक उन्हें और उनके परिवार को न्यायालय से इंसाफ मिला है और आगे भी मिलेगा। मीडिया से बात भी नहीं करने दीं जा रही है, देखिए यह है लोकतंत्र। आने वाली 10 मार्च को जुल्म खत्म होगा और अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है। अब्दुल्ला ने कहा कि बेरोजगार नौजवान महंगाई से परेशान है। इसके बाद वह गाड़ी से रामपुर के लिए रवाना हो गए। गाड़ी में उनके साथ परिवार के कुछ लोग मौजूद थे।

अब्दुल्ला पर करीब 43 मुकदमे दर्ज हैं

बता दें, शनिवार को उनके सभी 43 मामलों में परवाने आने के बाद जेल प्रशासन ने दोपहर में ही उनकी रिहाई सुनिश्चित कर दी थी। अब्दुल्ला आजम खान 23 महीने से सीतापुर जिला कारागार में बंद थे। उनके खिलाफ लगभग 43 मुकदमे दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि सभी 43 मुकदमों में अब्दुल्ला आजम को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

फरवरी 2020 से पिता संग बंद थे बेटे अब्दुल्ला

सपा के कद्दावर नेता आजम खान और बेटे अब्दुल्ला आजम को 27 फरवरी 2020 से रामपुर जेल से सीतापुर जेल में शिफ्ट किया गया था, जिसके बाद वह जिला कारागार में ही बंद थे।। जानकारों की माने तो अब्दुल्ला की जमानत तो पहले ही हो चुकी थी, लेकिन जमानतदार दाखिल न करने की वजह से समय से उनकी रिहाई नहीं हो सकी। विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही अब्दुल्ला आजम के सभी जमानतदार दाखिल कर दिए गए। अब उनकी रिहाई भी कर दी गई।

जेल में ही रहेंगे अभी आजम खान

सपा सांसद और सपा के फायर ब्रांड नेता आजम खां अभी भी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि दर्जनों मामलों में उनकी जमानत मंजूर होना बाकी है। बेटे की आज रिहाई के बाद आजम खां जेल में अकेले हो गए हैं। उनको बाहर आने में अभी काफी समय लग सकता है।

हाईकोर्ट ने रद्द किया था अब्दुल्ला का निर्वाचन

अब्दुल्ला आजम 2017 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे और जीतकर विधायक भी बन गए थे लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी नवाब काजिम अली और सुना वेद मियां ने अब्दुल्ला आजम की उम्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल्लाह आजम का निर्वाचन रद्द कर दिया था। वह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।